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12 अक्टूबर 2025

The Accidental Journalist

पुस्तकाचं नाव: The Accidental Journalistलेखक: वामन सुभा प्रभू (Waman Subha Prabhu)प्रकाशक: साहित्य प्रकाशन / ग्रंथाभिमान (2021) “पत्रकार होणं ही अनेकदा नियोजित निवड नसते — कधी कधी ती एक अनपेक्षित घडामोड असते.” The Accidental Journalist या शीर्षकातच ही जाणीव दडलेली आहे. वामन सुभा प्रभू यांच्या या आत्मकथनात एक आकस्मिक पण समर्पित पत्रकारितेचा प्रवास उलगडतो. गोपनीयता, धैर्य, आणि सत्य शोधण्याची जिद्द — या तीन स्तंभांवर उभं राहिलेलं हे पुस्तक, गोव्यातील समाज-राजकारणाचं आणि पत्रकारितेचं एका प्रत्यक्ष अनुभवातून लिहिलेलं साक्षीदार आहे. वामन सुभा प्रभू हे गोव्याचे ज्येष्ठ पत्रकार आणि लेखक. जवळपास पाच दशकं त्यांनी स्थानिक छापील माध्यमे आणि नंतर इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारितेत कारकीर्द घडवली. गोमंतक या वृत्तपत्रातून सुरुवात करताना त्यांनी सामाजिक प्रश्नांपासून ते राजकीय संघर्षांपर्यंत अनेक विषयांवर निर्भीडपणे लिहिलं. त्यांच्या लिखाणात स्थानिकतेचं सूक्ष्म निरीक्षण आणि राष्ट्रीय प्रश्नांची जाण या दोन्हींची सांगड दिसते. The Accidental Journalist हे त्यांचं आत्मकथनात्मक पुस्तक त्यांच्या कारकीर्दीचा, संघर्षांचा आणि अनुभवांचा जिवंत दस्तऐवज आहे. गोव्यातील राजकारण, समाज आणि संस्कृती यांचं ऐतिहासिक संदर्भातलं प्रतिबिंब त्यांच्या लिखाणामुळे वाचकांपुढे स्पष्ट उभं राहतं. The Accidental Journalist हा ग्रंथ आत्मकथनाच्या धाटणीने लिहिलेला असला तरी त्यात केवळ वैयक्तिक आठवणी नाहीत; तो गोव्यातील पत्रकारितेचा, समाजाचा आणि बदलत्या राजकीय-आर्थिक वातावरणाचा आरसा आहे. हे पुस्तक २०२१ मध्ये प्रकाशित झालं असून, पानसंख्या सुमारे २०६ आहे. यात प्रभू यांनी आपला पत्रकारितेतला प्रवास “अनपेक्षित प्रवेश” या रूपकातून सांगितला आहे. सुरुवातीला पत्रकार होण्याचा हेतू नसतानाही प्रसंगांनी आणि परिस्थितींनी त्यांना या व्यवसायात खेचून आणलं. ही कहाणी म्हणजे पत्रकारितेत उतरणाऱ्या अनेक तरुणांच्या भावनांचं प्रतीक आहे. ग्रंथात त्यांनी गोव्याच्या सामाजिक-राजकीय परिदृश्याचं बारकाईने चित्रण केलं आहे. स्वातंत्र्योत्तर गोव्यातील बदल, भाषा आंदोलन, स्थानिक राजकारणातील नाट्यमय उलथापालथ, सांस्कृतिक घडामोडी — हे सर्व प्रसंग त्यांनी स्वतःच्या अनुभवातून वाचकांपुढे ठेवले आहेत. पत्रकारितेतील धोकादायक प्रसंग, सत्ता-विरोधी भूमिका घेताना आलेल्या अडचणी, आणि “पत्रकार म्हणजे फक्त बातमी देणारा नव्हे तर समाजाचा आरसा” हा संदेश पुस्तकातून पुन्हा पुन्हा उमटतो. लेखकाने पत्रकारितेच्या ध्येयधोरणाबद्दल गंभीर विचार मांडले आहेत. बातमी ही वस्तुस्थितीची मांडणी असली तरी तिच्या मागे प्रामाणिकपणा आणि धैर्य आवश्यक आहे, हे ते ठामपणे सांगतात. भ्रष्टाचार, राजकीय दबाव, आणि मीडिया–कॉर्पोरेट संगनमत या मुद्द्यांना त्यांनी स्पर्श केला आहे. पुस्तकाचं वेगळेपण म्हणजे त्याची स्थानिकता आणि वैश्विकता. गोव्यातील लहान वाटणारे प्रसंग आणि त्यातील संघर्ष, हे प्रत्यक्षात भारतातील पत्रकारितेच्या व्यापक प्रवासाचं रूपक आहेत. वामन प्रभूंची शैली साधी, प्रामाणिक आणि जिवंत आहे.

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हरियाणा के आईपीएस वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या मामले में एफ़आईआर दर्ज; पत्नी अमनीत पी. कुमार ने एफआईआर में ‘अधूरी जानकारी’ पर सवाल उठाए।

हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या पर विवाद गहराया

चंडीगढ़ | १० अक्टूबर २०२५:हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या के मामले में अब कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन मृतक अधिकारी की पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने एफआईआर में अधूरी जानकारी और कमजोर धाराओं पर आपत्ति जताई है। अमनीत पी. कुमार ने चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर को पत्र लिखकर कहा कि एफआईआर में दर्ज आरोपियों के नाम सही और पूर्ण रूप से दर्ज नहीं किए गए हैं। उन्होंने ‘एससी/एसटी एक्ट’ के तहत लगाई गई हल्की धाराओं को संशोधित करने की मांग की है। एफआईआर में वरिष्ठ अफ़सरों के नाम — SIT करेगी जांच इस मामले में हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ़ केस दर्ज किया गया है।हरियाणा पुलिस ने जांच के लिए एक छह सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है, जिसकी अध्यक्षता चंडीगढ़ के आईजी पुष्पेंद्र कुमार करेंगे। चंडीगढ़ पुलिस ने बताया कि घर के सीसीटीवी फुटेज, कथित सुसाइड नोट, और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त किए गए हैं। घटना स्थल — सेक्टर 11, चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास — को फिलहाल सील कर दिया गया है। कौन थे वाई. पूरन कुमार? वाई. पूरन कुमार हरियाणा कैडर के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी थे।मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले, कुमार इंजीनियरिंग स्नातक थे और उन्होंने अपने करियर में अंबाला और कुरुक्षेत्र में एसपी के रूप में कार्य किया।बाद में वे अंबाला और रोहतक रेंज के आईजी के पद पर भी रहे। उनकी पत्नी अमनीत पी. कुमार हरियाणा सरकार में आईएएस अधिकारी हैं और विदेश सहयोग विभाग में सचिव और आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं। घटना के समय वे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ जापान दौरे पर गए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने परिजनों से की मुलाक़ात मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जापान से लौटने के बाद चंडीगढ़ में वाई. पूरन कुमार के परिजनों से मिले।उन्होंने अमनीत पी. कुमार से एक घंटे तक मुलाक़ात की, लेकिन मीडिया से कोई बयान नहीं दिया।मुख्यमंत्री की तय प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी अंतिम क्षणों में रद्द कर दी गई। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उसी शाम डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर को आवास पर बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली।हालाँकि पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि डीजीपी इस पर औपचारिक बयान “उचित समय पर” देंगे। सरकार पर सवाल, प्रशासन में हलचल राज्य सरकार इस मामले को लेकर गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में है।मीडिया के सवालों पर हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सिर्फ इतना कहा — “वाई. पूरन कुमार एक सक्षम अधिकारी थे, इससे ज़्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता।” उनके इस बयान से मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज़ है कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच संभव होगी, जब इसमें शीर्ष पुलिस अधिकारी ही आरोपी हैं। घटना की जांच और तकनीकी साक्ष्य चंडीगढ़ पुलिस के अनुसार, पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह “आत्महत्या प्रतीत होने वाला मामला” है, लेकिन दबाव या उत्पीड़न की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मौत अब सिर्फ एक आत्महत्या का मामला नहीं रही — यह प्रशासनिक जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता की परीक्षा बन गई है।एफआईआर में दर्ज नामों और धाराओं पर उठे सवाल इस जांच की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार ने SIT गठित करके एक औपचारिक कदम उठाया है, लेकिन सवाल अभी भी ज़िंदा हैं —क्या यह सिर्फ “जांच की प्रक्रिया” होगी, या किसी सत्य की खोज तक पहुँचेगी? ✍️ लेखक : कोंकणधारा नेशनल डेस्क

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भारत दौरे पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने कहा — ब्रिटेन भारत के लिए वीज़ा नियमों में ढील नहीं देगा; दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा।

भारत दौरे से पहले ब्रिटेन के पीएम किएर स्टार्मर बोले — वीज़ा नियमों में ढील नहीं

नई दिल्ली | ९ अक्टूबर २०२५:भारत दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए साफ़ कहा कि उनकी सरकार भारत के लिए वीज़ा नियमों में कोई ढील नहीं देने जा रही है।उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की इमिग्रेशन नीति घरेलू प्राथमिकताओं और सुरक्षा हितों पर आधारित है, और इसमें किसी तरह का अपवाद संभव नहीं है। स्टार्मर बुधवार को दो दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे, जहाँ वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करेंगे। उनके साथ उद्योगपतियों, राजनेताओं और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।उनकी इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है — भारत–ब्रिटेन व्यापार संबंधों को मज़बूत करना और ब्रिटेन की धीमी अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाना। भारत–ब्रिटेन व्यापार समझौता: जुलाई में हुआ ऐतिहासिक करार दोनों देशों के बीच कई सालों की बातचीत के बाद इसी वर्ष जुलाई में “India–UK Free Trade Agreement” पर हस्ताक्षर हुए थे।इस समझौते के तहत — समझौते में भारत से ब्रिटेन में शॉर्ट-टर्म वर्क वीज़ा पर काम करने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के भुगतान से तीन साल की छूट दी गई है।हालाँकि, स्टार्मर ने साफ़ किया कि “ब्रिटेन की इमिग्रेशन नीति में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।” ब्रिटेन की सख़्त होती इमिग्रेशन नीति किएर स्टार्मर की लेबर पार्टी की सरकार पिछले कुछ महीनों से इमिग्रेशन को लेकर सख़्त नीति अपना रही है।हाल ही में पार्टी सम्मेलन में ब्रिटेन में सेटलमेंट स्टेटस और वर्क वीज़ा को लेकर और कठोर नियमों की घोषणा की गई थी। ब्रिटेन में इमिग्रेशन घरेलू राजनीति का बड़ा मुद्दा है। वहाँ के नागरिकों के बीच यह धारणा मज़बूत है कि विदेशी कामगारों की संख्या बढ़ने से रोज़गार पर असर पड़ता है।इसी वजह से लेबर सरकार अपनी नीतियों को “जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कठोर” बनाए रख रही है। 🧠 विश्लेषक बोले — “भारतीय उम्मीदों पर ठंडा पानी” अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक रॉबिंदर सिंह सचदेव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा — “ये निश्चित तौर पर थोड़ी मायूसी वाली ख़बर है। ब्रिटेन वीज़ा नियमों को और सख़्त करने जा रहा है। भारतीय उम्मीद कर रहे थे कि अमेरिका द्वारा एच-1बी वीज़ा नियमों को टाइट किए जाने के बाद ब्रिटेन कुछ राहत देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।” उन्होंने आगे कहा, “ये ब्रिटेन की आंतरिक राजनीतिक ज़रूरत है। वहां के नागरिक इमिग्रेशन को अपने हितों के ख़िलाफ़ देखते हैं, इसलिए प्रधानमंत्री स्टार्मर को यही नीति रखनी होगी।” 📊 “यह निराशा नहीं, यथार्थ है” — मोनिका वर्मा अंतरराष्ट्रीय मामलों की विशेषज्ञ डॉ. मोनिका वर्मा का मानना है कि इस बयान को “अवसर खोने” के रूप में नहीं, बल्कि “रणनीतिक प्राथमिकता के संकेत” के रूप में देखा जाना चाहिए। “स्टार्मर का भारत दौरा मुख्यतः व्यापार समझौते से जुड़ा है, वीज़ा इस एजेंडा का हिस्सा नहीं है। आगे के चरणों में इस पर बात हो सकती है। इसलिए इसे लेकर निराश होने की ज़रूरत नहीं है।” उनके अनुसार, इमिग्रेशन का सवाल ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता से जुड़ा है। “स्टार्मर की पहली ज़िम्मेदारी ब्रिटिश नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। भारत के साथ संबंधों में यह व्यावहारिक यथार्थ है, न कि विरोध।” 🌍 पृष्ठभूमि: भारत और वैश्विक वर्क वीज़ा परिदृश्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीज़ा नियमों को सख़्त करने के बाद भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर बड़ा असर पड़ा था।ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि ब्रिटेन भारतीय तकनीकी कर्मियों और छात्रों के लिए नई संभावनाएँ खोलेगा, लेकिन स्टार्मर का यह बयान उस उम्मीद पर विराम लगाता है। ब्रिटेन की कंपनियाँ लंबे समय से मांग कर रही हैं कि कुशल विदेशी कर्मियों के लिए वीज़ा प्रक्रियाएँ आसान की जाएं, ताकि आर्थिक उत्पादकता बढ़ाई जा सके।हालाँकि, सरकार घरेलू राजनीतिक दबाव में इस दिशा में कोई बड़ा कदम उठाने से बच रही है। किएर स्टार्मर का “वीज़ा में ढील नहीं” वाला बयान भारत के लिए राजनैतिक रूप से सख़्त, लेकिन आर्थिक रूप से व्यावहारिक संकेत है। भारत–ब्रिटेन के बीच व्यापारिक रिश्ते बढ़ रहे हैं, पर मानव संसाधन नीति पर मतभेद बने हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में अगर व्यापार करार का दूसरा चरण शुरू होता है, तो टैलेंट मोबिलिटी और शिक्षा वीज़ा के मुद्दे उस चर्चा का अहम हिस्सा होंगे।फिलहाल, यह यात्रा ब्रिटेन के लिए आर्थिक निवेश और भारत के लिए राजनैतिक सहयोग की परीक्षा मानी जा रही है। ✍️ लेखक : कोंकणधारा ग्लोबल डेस्क

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पश्चिम बंगाल हादरा: वैद्यकीय विद्यार्थिनीवर सामूहिक बलात्कार; राज्यात संताप

📰 पश्चिम बंगालमध्ये पुन्हा हादरा — वैद्यकीय विद्यार्थिनीवर सामूहिक बलात्कार; राजकीय आरोप–प्रत्यारोप तीव्र दुर्गापूर / कोलकाता | १३ ऑक्टोबर २०२५:पश्चिम बंगालमधील दुर्गापूर येथे ओडिशातील एका वैद्यकीय विद्यार्थिनीवर झालेल्या सामूहिक बलात्काराच्या घटनेने संपूर्ण राज्य हादरलं आहे.या घटनेवरून राजकीय वादंग उफाळला असून, विरोधी भाजपाने ममता बनर्जी सरकारवर तीव्र हल्ला चढवला आहे, तर सत्ताधारी तृणमूल काँग्रेसने अशा संवेदनशील प्रकरणाचं राजकारण न करण्याचं आवाहन केलं आहे. ⚖️ घटनेचा तपशील — विद्यार्थिनीला जंगलात ओढून नेऊन बलात्कार पोलिसांच्या प्राथमिक तपासानुसार, दुर्गापूरमधील एका खाजगी वैद्यकीय महाविद्यालयात दुसऱ्या वर्षात शिकणारी विद्यार्थिनी शुक्रवारी रात्री साडेआठच्या सुमारास आपल्या मित्रासोबत कॉलेज कॅम्पसच्या बाहेर गेली होती.त्या दरम्यान तीन अज्ञात युवक तिथं पोहोचले, आणि तिचा मित्र घाबरून घटनास्थळ सोडून गेला. यानंतर आरोपींनी विद्यार्थिनीला जबरदस्तीने जंगलात नेऊन सामूहिक बलात्कार केला.पोलिसांच्या माहितीनुसार, आरोपींनी तिचा मोबाइल फोन हिसकावून घेतला आणि पैसे मागितले, तसेच “कोणाला सांगितलं तर परिणाम भोगावे लागतील” अशी धमकी दिली. 🚨 पोलिसांची तत्परता — सीसीटीव्ही फुटेज आणि साक्ष तपासणी दुर्गापूरच्या न्यू टाउनशिप पोलिस ठाण्याचे अधिकारी यांनी सांगितलं की, “घटनेनंतर तातडीने विद्यार्थिनीच्या मित्राचा जबाब घेतला असून, परिसरातील सीसीटीव्ही फुटेजचा तपास सुरू आहे.” पोलिसांनी पीडितेचा विधान अधिकृतपणे नोंदवला असून, तिला कॉलेजच्या रुग्णालयात उपचारासाठी दाखल करण्यात आलं आहे.पीडितेचं कुटुंबीय ओडिशातील जलेश्वर येथील असून, त्यांनीही औपचारिक तक्रार दाखल केली आहे. 🧾 बंगाल पोलिसांची प्रतिक्रिया — “दोषींना शिक्षा होणारच” पश्चिम बंगाल पोलिसांनी सोशल मीडियावर निवेदन प्रसिद्ध करत म्हटलं आहे — “दुर्गापूरमध्ये ओडिशा येथील वैद्यकीय विद्यार्थिनीवर झालेल्या लैंगिक अत्याचाराने आम्हाला अत्यंत दुःख झालं आहे.दोषींना शिक्षा न करता कोणालाही वाचू देणार नाही.महिलांविरुद्ध गुन्ह्यांबाबत आमची शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) नीती कायम आहे.” 👩‍👧 कुटुंबीयांचा आक्रोश — “शिकवायला पाठवलं, पण असं होईल असं वाटलं नव्हतं” विद्यार्थिनीच्या पालकांनी माध्यमांशी बोलताना संताप व्यक्त केला.मातेने सांगितलं — “शुक्रवारी रात्री आमच्या मुलीच्या मित्राचा फोन आला, दुसऱ्या दिवशी सकाळी आम्ही दुर्गापूरला पोहोचलो.आम्हाला वाटलं नव्हतं की तिला असा अत्याचार सहन करावा लागेल.” वडिलांनी म्हटलं — “या कॉलेजची ख्याती ऐकून आम्ही तिला येथे वैद्यकीय शिक्षणासाठी पाठवलं.पण आता आमचा विश्वास आणि सुरक्षिततेचा भास दोन्ही तुटला आहे.” 🧍‍♀️ राष्ट्रीय महिला आयोगाचा हस्तक्षेप राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) चं प्रतिनिधीमंडळ दुर्गापूर येथे पोहोचलं असून,सदस्या अर्चना मजूमदार यांनी रुग्णालयात पीडितेची आणि तिच्या पालकांची भेट घेतली.त्यांनी म्हटलं — “पश्चिम बंगालमध्ये महिलांविरुद्ध गुन्ह्यांची वाढ चिंताजनक आहे.पोलिसांकडून सक्रिय पावलं न उचलणं हे अत्यंत दुर्दैवी आहे.मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यांनी स्वतः या प्रकरणात पुढाकार घ्यावा.” 🗣️ भाजपचा हल्ला — “कायदा-सुव्यवस्था कोलमडली” विधानसभेतील विरोधी पक्षनेते सुवेंदु अधिकारी यांनी सरकारवर हल्ला करत म्हटलं — “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यांच्या हातीच पोलिस विभाग आहे,आणि त्यांच्या राजवटीत राज्यात कायदा-सुव्यवस्था पूर्णपणे ढासळली आहे.गेल्या वर्षी आरजी कर मेडिकल कॉलेजमधील बलात्कारानंतरही महिला असुरक्षितच आहेत.” भाजप कार्यकर्त्यांनी न्यू टाउनशिप पोलिस ठाण्यासमोर आंदोलन करत दोषींच्या तातडीच्या अटकेची मागणी केली.भाजप आयटी सेलप्रमुख अमित मालवीय यांनीही एक्स (X) वर पोस्ट करत घटनेचा निषेध केला. 🏛️ काँग्रेसची मागणी — “महिलांच्या सुरक्षेत सरकार अपयशी” पश्चिम बंगाल काँग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार यांनी सांगितलं — “ही घटना राज्यातील महिलांच्या सुरक्षेबाबत सरकारच्या अपयशाचं द्योतक आहे.आम्ही त्वरित चौकशी आणि दुर्गापूरमध्ये निरीक्षणासाठी विशेष पथक पाठवण्याची मागणी करतो.” 🕊️ तृणमूल काँग्रेसचा प्रतिसाद — “राजकारण नको, न्यायाची प्रक्रिया चालू आहे” राज्याच्या महिला व बालविकास मंत्री शशी पांजा यांनी म्हटलं — “ही घटना अत्यंत दुर्दैवी आहे.पण अशा प्रसंगाचं राजकीयरण न करता दोषींवर कठोर कारवाई होईपर्यंत संयम ठेवावा.तृणमूल काँग्रेस महिला सशक्तीकरणासाठी कटिबद्ध आहे.” दुर्गापूर येथील वैद्यकीय विद्यार्थिनीवरील सामूहिक बलात्काराची घटनाराज्याच्या कायदा-सुव्यवस्थेवर आणि महिलांच्या सुरक्षिततेवर गंभीर प्रश्न उपस्थित करते.सरकारनं तातडीने आणि पारदर्शकतेनं कारवाई केल्याशिवाय जनतेचा विश्वास परत मिळणं अवघड ठरणार आहे.

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‘कांतारा चॅप्टर 1’चा बॉक्स ऑफिसवर दणका — ‘दंगल’चाही विक्रम मोडला!

🎬 ‘कांतारा चॅप्टर 1’चा दणक्यात विकेंड — १० दिवसांत ‘दंगल’चा विक्रम मोडला! मुंबई | १३ ऑक्टोबर २०२५:दक्षिण भारतीय अभिनेता आणि दिग्दर्शक ऋषभ शेट्टी यांचा बहुप्रतिक्षित चित्रपट ‘कांतारा चॅप्टर 1’ सध्या भारतीय बॉक्स ऑफिसवर अक्षरशः इतिहास घडवत आहे.फिल्मच्या प्रदर्शानाला आज १० दिवस पूर्ण झाले असून, विकेंडला झालेल्या मोठ्या उसळीमुळे याने ‘दंगल’च्या भारतीय कमाईचा विक्रम मोडला आहे. 💰 १० दिवसांत तब्बल ₹३९६.६५ कोटींची कमाई ‘कांतारा चॅप्टर 1’ने ८ दिवसांच्या विस्तारित पहिल्या आठवड्याततमिळ, तेलुगू, कन्नड, मल्याळम, हिंदी आणि बांगला भाषांमधून मिळून ₹३३७.४ कोटींची कमाई केली होती. ९व्या दिवशी फिल्मचा कलेक्शन ₹२२.२५ कोटींवर पोहोचला — जो मागील दिवसाच्या तुलनेत ५.२% ने अधिक होता.तर १०व्या दिवशी म्हणजे शनिवारी, सकाळी १०:३० वाजेपर्यंतच चित्रपटाने ₹३७ कोटींचा गल्ला गोळा केला.एकूण मिळून फिल्मचं टोटल नेट कलेक्शन ₹३९६.६५ कोटींवर पोहोचलं आहे. हे आकडे सॅक्निल्कच्या प्राथमिक अंदाजांनुसार आहेत आणि अंतिम आकडेवारीत थोडा फरक संभवतो. 🏆 ‘दंगल’चा विक्रम मोडला २०१६ मध्ये आमिर खानच्या ‘दंगल’ने भारतीय बॉक्स ऑफिसवर सर्वाधिक कमाईचा विक्रम रचला होता.‘दंगल’ने भारतात सर्व भाषांमधून मिळून ₹३८७.३८ कोटी कमावले होते, तर‘कांतारा चॅप्टर 1’ने फक्त १० दिवसांतच हा आकडा ओलांडला आहे. जागतिक स्तरावर ‘दंगल’ची कमाई ₹२०७०.३ कोटींहून अधिक होती.तथापि, भारतातील सर्व भाषांतील एकत्रित कमाईत आता ‘कांतारा चॅप्टर 1’ आघाडीवर आला आहे. 🌍 वर्ल्डवाइड कलेक्शन आणि विक्रमांची मालिका ‘कांतारा चॅप्टर 1’चा वर्ल्डवाइड कलेक्शन सध्या ₹४५० कोटींच्या उंबरठ्यावर आहे.दुसऱ्या विकेंडनंतर या फिल्मने भारताबाहेरही, विशेषतः अमेरिका, यूके आणि गल्फ देशांमध्ये जबरदस्त प्रतिसाद मिळवला आहे. चित्रपट समीक्षकांच्या मते, “कांतारा ही फक्त फिल्म नाही, तर ती एक सांस्कृतिक आणि आध्यात्मिक अनुभव आहे.स्थानिक पौराणिकतेला जागतिक व्यासपीठावर नेण्यात ऋषभ शेट्टी यशस्वी ठरले आहेत.” 🎥 काय आहे ‘कांतारा चॅप्टर 1’? ही फिल्म ‘कांतारा’ (२०२२) या ब्लॉकबस्टर चित्रपटाचा प्रीक्वल आहे.कथेचा प्रवास काही शतकांपूर्वीचा असून,दैवत, निसर्ग आणि माणसाच्या अहंकारातील संघर्ष यावर ती आधारित आहे.ऋषभ शेट्टी यांनी केवळ दिग्दर्शनच केलं नाही, तर मुख्य भूमिकाही साकारली आहे. 🎟️ फॅन्सचा उत्साह आणि सोशल मीडिया ट्रेंड फिल्मच्या यशानंतर सोशल मीडियावर #KantaraChapter1 हा हॅशटॅग ट्रेंड होत आहे.फॅन्सचा प्रतिसाद असा की — “ही फक्त फिल्म नाही, तर एक दिव्य अनुभव आहे.” चित्रपटगृहांबाहेर अनेक ठिकाणी ‘देव-देवता नृत्य’ आणि पारंपरिक डफली साजरे करण्यात येत आहेत. ‘कांतारा चॅप्टर 1’ने दाखवून दिलं आहे की कंटेंट, संस्कृती आणि प्रामाणिकता यांच्या जोरावर कोणताही चित्रपट जागतिक स्तरावर गाजू शकतो.आता सर्वांचे लक्ष या चित्रपटाच्या ५०० कोटींच्या क्लबमध्ये प्रवेशावर केंद्रीत आहे.

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उत्तराखंड पेपर लीक प्रकरणात स्नातक परीक्षा रद्द — तीन महिन्यांत नव्या तारखा

📰 पेपर लीक प्रकरणानंतर उत्तराखंड स्नातक परीक्षा रद्द — तीन महिन्यांत पुन्हा परीक्षा; सीबीआय चौकशीची मागणी देहरादून | १२ ऑक्टोबर २०२५:उत्तराखंड राज्यातील पेपर लीक प्रकरणाचा फटका थेट विद्यार्थ्यांना बसला आहे.राज्याच्या विविध सरकारी विभागांमध्ये भरतीसाठी घेण्यात आलेली स्नातक स्तरीय परीक्षा (UKSSSC) अधिकृतपणे रद्द करण्यात आली आहे.आयोगाचे अध्यक्ष जी. एस. मर्तोलिया यांनी शनिवारी ही घोषणा केली. ही परीक्षा २१ सप्टेंबर रोजी घेण्यात आली होती, आणि आता ती तीन महिन्यांच्या आत पुन्हा आयोजित केली जाईल, असं त्यांनी स्पष्ट केलं. ⚖️ न्यायमूर्ती ध्यानी आयोगाचा अहवाल सादर या घोटाळ्याची चौकशी करण्यासाठी राज्य सरकारने निवृत्त न्यायाधीश यू. सी. ध्यानी यांच्या अध्यक्षतेखाली चौकशी आयोग गठीत केला होता.शनिवारी या आयोगाने आपला अंतरिम अहवाल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यांना सादर केला. मुख्यमंत्री धामी म्हणाले — “आयोगाने कमी वेळात व्यापक जनसुनावणी करून विद्यार्थ्यांचे आणि संबंधित पक्षांचे म्हणणे ऐकून अहवाल तयार केला आहे.विद्यार्थ्यांच्या हितासाठी हा निर्णय आवश्यक होता.” 🧾 मुख्यमंत्री धामींची घोषणा — “विद्यार्थ्यांच्या विश्वासाशी तडजोड नाही” मुख्यमंत्री धामींनी सोशल मीडियावर विद्यार्थ्यांना उद्देशून लिहिलं — “२१ सप्टेंबर रोजी घेतलेली परीक्षा विद्यार्थ्यांच्या हितासाठी रद्द करण्याचा निर्णय घेतला आहे.परीक्षांची शुचिता, पारदर्शकता आणि विश्वास टिकवण्यासाठी हा आवश्यक पाऊल आहे.” त्यांनी हेही स्पष्ट केलं की, या निर्णयामुळे राज्यातील इतर भरती परीक्षांच्या कार्यक्रमावर कोणताही परिणाम होणार नाही.राज्य सरकारने या प्रकरणाच्या सीबीआय चौकशीची शिफारस देखील केली आहे. 📚 घोटाळ्याची पार्श्वभूमी — हरिद्वारमधून पेपर लीक ही परीक्षा राज्यातील ४१६ पदांसाठी आयोजित करण्यात आली होती, ज्यामध्ये १ लाखांहून अधिक उमेदवार सहभागी झाले होते.मात्र, परीक्षा सुरू असतानाच हरिद्वारमधील आदर्श बाल इंटर कॉलेज (बहादरपूर जट) येथून प्रश्नपत्रिकेच्या तीन पानांचा लीक प्रकरण उघडकीस आलं. तपासात समोर आलं की, आरोपी खालिद नावाचा विद्यार्थी परीक्षा सुरू झाल्यानंतर इन्व्हिजिलेटरकडून परवानगी घेऊन वॉशरूममध्ये गेला आणिमोबाइल फोनद्वारे प्रश्नपत्रिकेचे फोटो आपल्या बहिणी साबिया हिला पाठवले. साबियाने हे फोटो पुढे टिहरी येथील सहायक प्राध्यापिका सुमन यांना पाठवले,ज्यांनी स्क्रीनशॉट घेत इतरांना पाठवले आणि ते सोशल मीडियावर व्हायरल झाले. 👮 मुख्य आरोपींची अटक आणि चौकशी सुरू एसआयटी (विशेष तपास पथक) ने पोलिस अधीक्षक जया बलूनी यांच्या नेतृत्वाखाली तातडीने कारवाई करतखालिद आणि साबिया या दोघांना अटक केली.तसेच, संबंधित चार अधिकाऱ्यांना निलंबित करण्यात आलं आहे. फॉरेन्सिक टीमकडून इलेक्ट्रॉनिक पुरावे जप्त करून चौकशी सुरू आहे. 🧠 “शुचिता आणि विश्वास टिकवणं हेच प्राधान्य” — मुख्यमंत्री धामी मुख्यमंत्री धामी यांनी पत्रकार परिषदेत सांगितले — “राज्यातील प्रत्येक विद्यार्थ्याला निष्पक्ष संधी आणि विश्वासार्ह परीक्षा प्रणाली देणं ही सरकारची प्राथमिकता आहे.विद्यार्थ्यांच्या भविष्याशी आणि पालकांच्या विश्वासाशी कुठलीही तडजोड केली जाणार नाही.” 📅 नव्या परीक्षेच्या तारखा लवकरच UKSSSC आयोगाने स्पष्ट केलं आहे की नवीन परीक्षा डिसेंबरअखेरपर्यंत घेतली जाईल.यावेळी सुरक्षा उपाय अधिक काटेकोर असतील —प्रत्येक केंद्रावर जॅमर आणि डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम बसवली जाणार आहे. पेपर लीक प्रकरणामुळे राज्यातील परीक्षा व्यवस्थेवर पुन्हा प्रश्नचिन्ह निर्माण झालं असलं तरी,सरकारचा तत्पर निर्णय आणि सीबीआय चौकशीचा आदेश यामुळे पारदर्शकतेकडे नव्या पावलाचं संकेत मिळतो. विद्यार्थ्यांच्या हक्कांशी आणि शिक्षणातील प्रामाणिकतेशी जोडलेला हा निर्णयउत्तराखंडच्या प्रशासकीय पारदर्शकतेसाठी एक महत्त्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट ठरू शकतो.

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राजस्थानात दोन वेगवेगळ्या ठिकाणी दुर्दैवी सामूहिक आत्महत्या — ८ जणांचा मृत्यू

📰 राजस्थानात दुहेरी दुर्दैव — सीकर आणि जयपूरमध्ये सामूहिक आत्महत्यांच्या दोन घटना; ८ जणांचा मृत्यू सीकर/जयपूर | १२ ऑक्टोबर २०२५:राजस्थानात शनिवारी दोन भयानक सामूहिक आत्महत्यांच्या घटना घडल्या असून, एकूण ८ जणांचा मृत्यू झाल्याची माहिती पोलिसांनी दिली आहे.सीकर आणि जयपूर या दोन वेगवेगळ्या शहरांतील घटनांनी राज्यभरात हळहळ व्यक्त केली जात आहे. 🏚️ सीकरमध्ये आईसह चार मुलांचा मृत्यू सीकर शहरातील पालवास रोडवरील अनिरुद्ध रेसिडेन्सी या इमारतीत एका कुटुंबातील पाच जणांनी विष प्राशन करून आत्महत्या केली.मृतांमध्ये आई किरण उर्फ पिंकी चौधरी आणि तिची चार लहान मुलं यांचा समावेश आहे. स्थानिक रहिवाशांना फ्लॅटमधून तीव्र दुर्गंध येत असल्याचे जाणवल्यावर त्यांनी पोलिसांना कळवले.सदर पोलीस ठाण्याचे अधिकारी आणि फॉरेन्सिक सायन्स लॅब (FSL) टीम घटनास्थळी दाखल झाली. फ्लॅटमधील दृश्य इतके भयावह होते की पोलिसांनी इत्र आणि अगरबत्ती फवारून आत प्रवेश केला.प्राथमिक तपासात हे समोर आलं की ही घटना काही दिवसांपूर्वी घडली होती, आणि दुर्गंध पसरल्यानंतरच तिचा उलगडा झाला. 🧩 कौटुंबिक कलह कारणीभूत? प्राथमिक चौकशीत समजते की किरण आणि तिच्या पतीमध्ये दीर्घकाळ वाद सुरू होता.या कौटुंबिक कलहामुळेच तिने हे टोकाचं पाऊल उचलल्याचा संशय पोलिसांनी व्यक्त केला आहे.मात्र, आत्महत्येचं नेमकं कारण स्पष्ट होण्यासाठी पोलिसांनी सखोल तपास सुरू केला आहे. 🏠 जयपूरमध्ये निवृत्त बँक अधिकाऱ्याच्या कुटुंबाची आत्महत्या दुसरी घटना जयपूरमधील करणी विहार पोलिस ठाण्याच्या हद्दीत घडली.इथे रूपेंद्र शर्मा नावाच्या निवृत्त बँक अधिकाऱ्याने, पत्नी सुशीला शर्मा आणि ३२ वर्षीय मुलगा पुलकित शर्मा यांच्यासह आत्महत्या केली. स्थानिक पोलिसांनी दरवाजा तोडून घरात प्रवेश केला तेव्हा तिघांचे मृतदेह आढळले.मृत्यूचे कारण म्हणून मालमत्तेवरील वाद आणि कौटुंबिक मतभेद नमूद करणारा इंग्रजी भाषेतील सुसाइड नोट घरातून सापडला आहे.पोलिसांनी सांगितले की, “सुसाइड नोटमधील मजकुराच्या आधारे जबाबदारी ठरवून पुढील कारवाई केली जाईल.” 🏦 रूपेंद्र शर्मा — बँक अधिकारी, निवृत्तीनंतर मानसिक ताणात? रूपेंद्र शर्मा हे बँकेतून स्वैच्छिक निवृत्ती (VRS) घेतलेले अधिकारी होते.मूळचे सोडाला परिसरातील असलेले शर्मा कुटुंब अलीकडे करणी विहार भागात भाड्याच्या घरात राहत होते.कुटुंबातील एकुलता एक मुलगा पुलकित या घटनेत मृत्युमुखी पडला आहे. पोलिसांनी घटनास्थळाचा पंचनामा करून फॉरेन्सिक टीमद्वारे तपास सुरू केला आहे.सध्या दोन्ही घटनांतील पार्श्वभूमी आणि कारणांवर अलग तपास पथके काम करत आहेत. 🧠 मानसिक आरोग्याविषयी जनजागृतीची गरज या दोन्ही घटना समाजातील मानसिक आरोग्य, ताणतणाव आणि कौटुंबिक कलह या गंभीर समस्यांकडे पुन्हा लक्ष वेधतात.तज्ज्ञांच्या मते, आत्महत्या हे फक्त वैयक्तिक अपयश नसून, सामाजिक आधार आणि संवादाचा अभाव याचंही प्रतिबिंब आहे. ☎️ मदत हवी असल्यास — हेल्पलाइन क्रमांक जर तुम्ही किंवा तुम्हाला ओळखणारा कोणी तणावग्रस्त किंवा मानसिक दबावाखाली असेल,तर त्वरित खालील हेल्पलाइनवर संपर्क साधा 👇 वंद्रेवाला फाउंडेशन फॉर मेंटल हेल्थ: 📞 9999666555 / 📧 help@vandrevalafoundation.com TISS iCall: ☎️ 022-25521111 (सोमवार ते शनिवार, सकाळी ८ ते रात्री १० पर्यंत उपलब्ध) लक्षात ठेवा — संवाद आणि मदत घेणं हेच जीवन वाचवण्याचं पहिलं पाऊल आहे.

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AIMIMची बिहार निवडणुकांसाठी पहिली यादी जाहीर — १६ जिल्ह्यांतील ३२ जागांवर उमेदवारी

📰 AIMIMचा बिहार निवडणुकीसाठी पहिला यादी जाहीर — १६ जिल्ह्यांतील ३२ जागांवर पक्षाची तयारी किशनगंज (बिहार) | १२ ऑक्टोबर २०२५:हैदराबादचे खासदार असदुद्दीन ओवैसी यांच्या ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पक्षाने बिहार विधानसभा निवडणुकांसाठी पहिल्या टप्प्यातील ३२ जागांची यादी जाहीर केली आहे.या यादीची विशेष बाब म्हणजे — ही घोषणा बिहारच्या किशनगंज जिल्ह्यातून करण्यात आली, जे सहसा पटना केंद्रस्थानी होत असलेल्या घोषणांपेक्षा वेगळं पाऊल आहे. पक्षाच्या या घोषणेमुळे बिहारमध्ये ‘तिसरा मोर्चा’ तयार होण्याची शक्यता अधिक बळावली आहे. 🗳️ किशनगंजहून ऐतिहासिक घोषणा शनिवारी किशनगंज येथील AIMIMच्या राज्य कार्यालयात पक्षाचे बिहार प्रदेशाध्यक्ष अख्तरुल इमान आणि राष्ट्रीय प्रवक्ते आदिल हुसैन यांनी ही यादी जाहीर केली.हे पहिल्यांदाच घडलं की एखाद्या राष्ट्रीय पक्षाने बिहारमधील आपली निवडणूक यादी पटना ऐवजी सीमावर्ती जिल्ह्यातून जाहीर केली. पक्षाने स्पष्ट केलं की ही फक्त पहिली यादी असून, आगामी काळात आणखी काही जागांवर AIMIM उमेदवार उभे राहतील. 📍 १६ जिल्ह्यांतील ३२ विधानसभा जागा — AIMIMचे उमेदवार किशनगंज जिल्हा: बहादुरगंज, ठाकुरगंज, कोचाधामन, किशनगंज पूर्णिया जिल्हा: अमौर, बायसी, क़स्बा कटिहार जिल्हा: बलरामपूर, प्राणपूर, मनिहारी, बरारी, कदवा अररिया जिल्हा: जोकीहाट, अररिया गया जिल्हा: शेरघाटी, बेला मोतिहारी जिल्हा: ढाका, नरकटिया नवादा जिल्हा: नवादा शहर जमुई जिल्हा: सिकंदरा भागलपूर जिल्हा: भागलपूर, नाथनगर सिवान जिल्हा: सिवान दरभंगा जिल्हा: जाले, केवटी, दरभंगा ग्रामीण, गौरा बौराम समस्तीपूर जिल्हा: कल्याणपूर सीतामढी जिल्हा: बाजपट्टी मधुबनी जिल्हा: बिस्फी वैशाली जिल्हा: महुआ गोपालगंज जिल्हा: गोपालगंज 🧭 “राजदने आमचा प्रस्ताव नाकारला, म्हणून तिसरा मोर्चा” — अख्तरुल इमान पत्रकार परिषदेत बोलताना AIMIMचे बिहार प्रदेशाध्यक्ष अख्तरुल इमान म्हणाले — “धर्मनिरपेक्ष मतांचं विभाजन होऊ नये म्हणून आम्ही RJDकडे आघाडीचा प्रस्ताव पाठवला होता.पण राजदने तो प्रस्ताव मान्य केला नाही. त्यामुळे आम्ही ‘तिसरा मोर्चा’ म्हणून स्वतंत्र लढाई लढण्याचा निर्णय घेतला आहे.” ते पुढे म्हणाले — “आमचा पक्ष पुरुषप्रधान राजकारणात महिलांना सन्मानाने जागा देणार आहे.पुढील काही दिवसांत सर्व ३२ जागांवरील उमेदवारांची घोषणा केली जाईल.” 🕊️ AIMIMची वाढती उपस्थिती २०१५ आणि २०२० मधील बिहार विधानसभा निवडणुकांमध्ये AIMIMला सीमांचल भागात चांगला जनाधार मिळाला होता.या वेळी किशनगंज, अररिया आणि कटिहारसह पूर्णिया विभागात पक्षाने मोहीम वेगाने सुरू केली आहे.असदुद्दीन ओवैसी यांच्या “जनता केंद्रित न्याय आणि मुस्लिम प्रतिनिधित्व” या मुद्द्यावर तरुण आणि अल्पसंख्यांक मतदारवर्गाची हालचाल दिसत आहे. ⚖️ राजकीय विश्लेषण — ‘तिसरा मोर्चा’ की ‘रणनीतिक दाब’ राजकीय तज्ज्ञांच्या मते, AIMIMची ही स्वतंत्र यादी जाहीर करणं हे RJD आणि काँग्रेससाठी दबावाचं राजकारण ठरू शकतं.राजद–कॉंग्रेस–लेफ्ट या आघाडीसमोर AIMIM आता सीमांचलमध्ये थेट आव्हान उभं करत आहे.त्याच वेळी, भाजप–जेडीयू सत्तारूढ आघाडीला मुस्लिम मतांचं विभाजन राजकीयदृष्ट्या फायदेशीर ठरू शकतं. AIMIMने जाहीर केलेल्या या पहिल्या यादीने बिहारच्या आगामी निवडणुकीत नवी राजकीय समीकरणं आणि तिसऱ्या पर्यायाची शक्यता निर्माण केली आहे.किशनगंजहून झालेली ही घोषणा केवळ राजकीय नव्हे, तर सांकेतिकदृष्ट्या AIMIMच्या स्वायत्त ओळखीचा संदेश देणारी आहे. आता सर्वांचे लक्ष असदुद्दीन ओवैसी यांच्या पुढील दौर्‍याकडे आणि ‘जनाधाराची परीक्षा’ ठरणाऱ्या सीमांचलमधील प्रतिक्रियेवर केंद्रित झालं आहे.

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तालिबान मंत्र्यांच्या पत्रकार परिषदेत महिला पत्रकारांचा बहिष्कार — एडिटर्स गिल्डचा तीव्र निषेध

📰 दिल्लीतील तालिबान मंत्र्यांच्या पत्रकार परिषदेत महिला पत्रकारांना प्रवेश नाकारल्यावर वाद — एडिटर्स गिल्डचा तीव्र निषेध नवी दिल्ली | १२ ऑक्टोबर २०२५:अफगाणिस्तानच्या तालिबान सरकारचे परराष्ट्र मंत्री अमीर खान मुत्तकी यांच्या दिल्लीतील पत्रकार परिषदेत महिला पत्रकारांना प्रवेश नाकारल्याच्या आरोपांवरून निर्माण झालेल्या वादाला नवी दिशा मिळाली आहे.शनिवारी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने या प्रकाराची कठोर निंदा करत, “हे वर्तन भेदभावपूर्ण आणि गंभीर चिंतेचं कारण आहे,”असं म्हटलं आहे. गिल्डने स्पष्ट केलं की, “ही घटना भारताच्या भूमीवर घडली आहे, आणि पत्रकार परिषदेत लिंगावर आधारित भेदभाव कुठल्याही परिस्थितीत ग्राह्य धरता येणार नाही.” 📰 प्रेस कॉन्फरन्स आणि वादाची पार्श्वभूमी शुक्रवारी नवी दिल्लीतील अफगाणिस्तानच्या दूतावासात तालिबान परराष्ट्र मंत्री अमीर खान मुत्तकी यांनी पत्रकार परिषद घेतली होती.मात्र या कार्यक्रमात कोणत्याही महिला पत्रकारांना आमंत्रण देण्यात आलं नव्हतं.ही बाब समोर आल्यानंतर पत्रकार संघटनांनी आणि राजकीय नेत्यांनी सरकारवर कठोर टीका केली. परराष्ट्र मंत्रालयाने याबाबत स्पष्टीकरण देत म्हटलं की, “भारत सरकारचा या पत्रकार परिषदेशी कोणताही संबंध नव्हता.”म्हणजेच, हा कार्यक्रम तालिबानच्या अधिकाऱ्यांनी स्वतंत्रपणे आयोजित केला होता. ⚖️ एडिटर्स गिल्डचा निषेध — “भारतीय भूमीवर असा भेदभाव अस्वीकार्य” एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडियाने आपल्या निवेदनात म्हटलं आहे — “महिला पत्रकारांना पत्रकार परिषदेतून बाहेर ठेवणं हा गंभीर भेदभाव आहे.मुत्तकींच्या या प्रेस ब्रीफिंगचा केंद्रबिंदू भारत–अफगाणिस्तान राजनैतिक संवाद होता,पण त्यात लिंगाधारित बहिष्कार पूर्णपणे अस्वीकार्य आहे.” गिल्डने पुढे वियना कन्व्हेन्शनचा उल्लेख करत म्हटलं — “राजनैतिक परिसरांना वियना कन्व्हेन्शननुसार संरक्षण असू शकतं,पण भारताच्या भूमीवर प्रेस अॅक्सेसमध्ये लिंगभेदास न्याय्य ठरवणं शक्य नाही.” 🧭 एकजुटीचा अभाव — ‘चिंताजनक आत्मसंतुष्टतेचा’ इशारा गिल्डच्या निवेदनात आणखी म्हटलं आहे — “हा कार्यक्रम परराष्ट्र मंत्रालयाने समन्वयित केला असो वा नसो,महिला पत्रकारांचा बहिष्कार ही अत्यंत चिंताजनक बाब आहे.विशेष म्हणजे, या भेदभावाविरुद्ध पत्रकार समुदायात एकत्रितपणे आवाज न उठवणं ही ‘चिंताजनक आत्मसंतुष्टता’ दर्शवते.” माध्यम क्षेत्रात एकजुटीचा अभाव हा स्वतः माध्यम स्वातंत्र्यासाठी धोका ठरू शकतो,असंही गिल्डने आपल्या वक्तव्यात नमूद केलं आहे. 🗣️ सरकारचं स्पष्टीकरण — “भारताचा या कार्यक्रमाशी काही संबंध नाही” भारताच्या परराष्ट्र मंत्रालयाने शुक्रवारी रात्री स्पष्टीकरण दिलं — “अमीर खान मुत्तकी यांनी घेतलेली पत्रकार परिषद ही पूर्णतः अफगाणिस्तानच्या अधिकाऱ्यांनी आयोजित केली होती.भारत सरकारचा या कार्यक्रमाशी कोणताही अधिकृत सहभाग नव्हता.” मंत्रालयाच्या या स्पष्टीकरणानंतरही पत्रकार संघटना आणि महिलांच्या हक्कांसाठी काम करणाऱ्या संस्थांनी सरकारकडून अधिक ठोस भूमिका घेण्याची मागणी केली आहे. 🌐 घटनेचा व्यापक परिणाम — प्रेस स्वातंत्र्य आणि लैंगिक समानतेचा प्रश्न या घटनेमुळे भारतातील माध्यम स्वातंत्र्य, पत्रकार सुरक्षाविषयक नैतिकता आणि महिलांच्या सहभागाविषयी नव्याने चर्चा सुरू झाली आहे.महिला पत्रकार संघटनांनी म्हटलं आहे की — “भारतीय भूमीवर होणाऱ्या कोणत्याही कार्यक्रमात‘तालिबानी विचारसरणी’सारखा भेदभाव मान्य केला जाऊ शकत नाही.” दिल्लीतील तालिबान मंत्र्यांच्या पत्रकार परिषदेत महिला पत्रकारांना प्रवेश न देणं ही घटना केवळ “आयोजनातील त्रुटी” नाही,तर माध्यम क्षेत्रातील समानतेच्या मूल्यांना दिलेला धोका आहे. एडिटर्स गिल्डचा निषेध हा माध्यम जगतातील सजगतेचा संकेत असला तरी,सरकार आणि पत्रकार संघटनांनी या घटनेकडे गंभीरतेने आणि एकजुटीने लक्ष देणं आवश्यक आहे.

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राघोपुरमध्ये नवी राजकीय लढाई — तेजस्वी यादव विरुद्ध प्रशांत किशोर?

📰 बिहारमध्ये नवी राजकीय झुंज — राघोपुरमध्ये ‘तेजस्वी यादव विरुद्ध प्रशांत किशोर’ सामना संभवतो वैशाली (बिहार) | १२ ऑक्टोबर २०२५:गंगेच्या काठावर वसलेल्या राघोपुर विधानसभा मतदारसंघात या वेळी बिहारच्या राजकारणात सर्वाधिक चर्चेत असलेली लढत पाहायला मिळू शकते.राष्ट्रीय जनता दलाचे (RJD) नेते आणि सध्या विरोधी पक्षनेते तेजस्वी यादव यांच्या विरोधात जन सुराज आंदोलनाचे संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) निवडणुकीच्या मैदानात उतरण्याची चर्चा रंगली आहे. या संभाव्य लढतीमुळे राघोपुर — जो RJD चा पारंपरिक बालेकिल्ला मानला जातो — बिहारच्या राजकारणातील सर्वात ‘VVIP’ सीट बनला आहे. 🗳️ तेजस्वींच्या गडात पीकेची एंट्री शनिवारी जन सुराजचे नेते प्रशांत किशोर राघोपुरमध्ये दाखल झाले.जनतेने त्यांचं स्वागत लाडवांनी तोलून आणि घोषणांच्या गजरात केलं.महिला, युवक आणि वृद्ध नागरिकांनी उत्साहाने त्यांची भेट घेतली. हीच ती जागा आहे जिथून तेजस्वी यादव दोन वेळा विधानसभा सदस्य म्हणून निवडून आले आणि दोनदा बिहारचे उपमुख्यमंत्री बनले.पण प्रशांत किशोर यांच्या राघोपुर भेटीने या वेळच्या निवडणुकीपूर्वी राजकीय समीकरणांना नवा कलाटणी मिळाल्याचं स्पष्ट दिसत आहे. 🏛️ “विकास नाही, फक्त सेटिंगवर विजय मिळवतात तेजस्वी” — प्रशांत किशोर राघोपुरातील सभेत प्रशांत किशोर यांनी थेट तेजस्वी यादवांवर हल्लाबोल करत म्हटलं — “ही तीच जागा आहे जिथून तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री झाले, पण आजही इथल्या मुलांसाठी योग्य शाळा नाही.विकासाच्या बाबतीत शून्य काम झालं आहे.तेजस्वी यादव ‘सेटिंग’ करून निवडणुका जिंकतात, पण यावेळी जनता त्यांना सेटिंग करू देणार नाही.” त्यांनी पुढे म्हटलं की, जन सुराज पक्ष ठरवेल की राघोपुरहून निवडणूक लढायची की नाही, “पण एवढं नक्की — सगळे आमच्यापासून घाबरले आहेत.इतकं की तेजस्वी यादवदेखील दोन ठिकाणांहून उमेदवारीची तयारी करत आहेत.” 📈 जन सुराजची रणनीती — “तेजस्वींच्या गडात सेंध” प्रशांत किशोर यांचा हा दौरा जन सुराजच्या व्यापक रणनीतीचा भाग मानला जातो.पक्षाच्या कार्यकर्त्यांच्या म्हणण्यानुसार, जन सुराज आता थेट “तेजस्वी यादव यांच्या घरात सेंध” घालण्याच्या तयारीत आहे.स्थानिक पातळीवर संघटनाचं जाळं वेगाने विस्तारत असून, तरुण आणि महिला वर्ग या चळवळीत मोठ्या प्रमाणात सामील होत आहेत. 🧭 “जर मी बाहेरचा असेन, तर तेजस्वीही बाहेरचेच” — पीकेचा पलटवार राघोपुरात काही लोकांनी त्यांना “बाहेरील” म्हणत विरोध व्यक्त केल्यावर प्रशांत किशोर यांनी तीव्र प्रतिक्रिया दिली — “जर मी बाहेरचा असेन, तर तेजस्वी यादवही बाहेरचेच आहेत.ते गोपालगंजचे असून राघोपुरातून निवडणूक लढतात.आता जनता ठरवेल — विकास हवा की फक्त घराणेशाही?” 📊 तेजस्वींसाठी आव्हान, पीकेसाठी कसोटी राजकीय विश्लेषकांच्या मते, प्रशांत किशोर यांची राघोपुरमधील उपस्थिती तेजस्वी यादवांसाठी सर्वात मोठं आव्हान ठरू शकते.RJD च्या पारंपरिक मतदारसंघात जन सुराजची उपस्थिती म्हणजे एक प्रकारे “राजकीय रिअॅलिटी टेस्ट” असेल.दुसरीकडे, प्रशांत किशोर यांच्यासाठी ही निवडणूक “राजकीय रणनीतिकार ते प्रत्यक्ष राजकारणी” असा संक्रमणबिंदू ठरू शकते. राघोपुरमधील सत्तेची लढाई आता फक्त RJD विरुद्ध जन सुराज नाही — ती “घराणेशाही विरुद्ध विकास” या घोषवाक्याभोवती फिरताना दिसते आहे.तेजस्वी यादव यांच्या गडात प्रशांत किशोर यांची एंट्री बिहारच्या निवडणुकीचा रंग बदलू शकते. आगामी काही आठवड्यांत जन सुराज पक्ष अधिकृत उमेदवार जाहीर करेल अशी शक्यता असून, या लढतीकडे संपूर्ण देशाचं लक्ष लागलेलं आहे.

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