चंडीगढ़ | १० अक्टूबर २०२५:
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या के मामले में अब कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन मृतक अधिकारी की पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने एफआईआर में अधूरी जानकारी और कमजोर धाराओं पर आपत्ति जताई है।
अमनीत पी. कुमार ने चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर को पत्र लिखकर कहा कि एफआईआर में दर्ज आरोपियों के नाम सही और पूर्ण रूप से दर्ज नहीं किए गए हैं। उन्होंने ‘एससी/एसटी एक्ट’ के तहत लगाई गई हल्की धाराओं को संशोधित करने की मांग की है।
एफआईआर में वरिष्ठ अफ़सरों के नाम — SIT करेगी जांच
इस मामले में हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ़ केस दर्ज किया गया है।
हरियाणा पुलिस ने जांच के लिए एक छह सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है, जिसकी अध्यक्षता चंडीगढ़ के आईजी पुष्पेंद्र कुमार करेंगे।
चंडीगढ़ पुलिस ने बताया कि घर के सीसीटीवी फुटेज, कथित सुसाइड नोट, और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त किए गए हैं। घटना स्थल — सेक्टर 11, चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास — को फिलहाल सील कर दिया गया है।
कौन थे वाई. पूरन कुमार?
वाई. पूरन कुमार हरियाणा कैडर के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी थे।
मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले, कुमार इंजीनियरिंग स्नातक थे और उन्होंने अपने करियर में अंबाला और कुरुक्षेत्र में एसपी के रूप में कार्य किया।
बाद में वे अंबाला और रोहतक रेंज के आईजी के पद पर भी रहे।
उनकी पत्नी अमनीत पी. कुमार हरियाणा सरकार में आईएएस अधिकारी हैं और विदेश सहयोग विभाग में सचिव और आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।
घटना के समय वे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ जापान दौरे पर गए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने परिजनों से की मुलाक़ात
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जापान से लौटने के बाद चंडीगढ़ में वाई. पूरन कुमार के परिजनों से मिले।
उन्होंने अमनीत पी. कुमार से एक घंटे तक मुलाक़ात की, लेकिन मीडिया से कोई बयान नहीं दिया।
मुख्यमंत्री की तय प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी अंतिम क्षणों में रद्द कर दी गई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उसी शाम डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर को आवास पर बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली।
हालाँकि पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि डीजीपी इस पर औपचारिक बयान “उचित समय पर” देंगे।
सरकार पर सवाल, प्रशासन में हलचल
राज्य सरकार इस मामले को लेकर गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में है।
मीडिया के सवालों पर हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सिर्फ इतना कहा —
“वाई. पूरन कुमार एक सक्षम अधिकारी थे, इससे ज़्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता।”
उनके इस बयान से मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज़ है कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच संभव होगी, जब इसमें शीर्ष पुलिस अधिकारी ही आरोपी हैं।
घटना की जांच और तकनीकी साक्ष्य
चंडीगढ़ पुलिस के अनुसार,
- सेक्टर 11 स्थित आवास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित कर ली गई है।
- कमरे को सील किया गया है और CFSL (Central Forensic Science Laboratory) की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।
- कथित सुसाइड नोट और डिजिटल उपकरण (लैपटॉप, फोन आदि) को जब्त कर जांच जारी है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह “आत्महत्या प्रतीत होने वाला मामला” है, लेकिन दबाव या उत्पीड़न की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मौत अब सिर्फ एक आत्महत्या का मामला नहीं रही — यह प्रशासनिक जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता की परीक्षा बन गई है।
एफआईआर में दर्ज नामों और धाराओं पर उठे सवाल इस जांच की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
सरकार ने SIT गठित करके एक औपचारिक कदम उठाया है, लेकिन सवाल अभी भी ज़िंदा हैं —
क्या यह सिर्फ “जांच की प्रक्रिया” होगी, या किसी सत्य की खोज तक पहुँचेगी?
✍️ लेखक : कोंकणधारा नेशनल डेस्क


















